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शहर में होलिका दहन से ख़राब होती हैं सड़के, नगर निगम ने बनायीं यह योजना,खर्च करेगी इतने …….

अगले महीने होली का त्यौहार है लेकिन उत्तर प्रदेश में होली महीना चढ़ते ही शुरू हो जाता है। आपको बता दें कि होलिका दहन के लिए शहर में जगह-जगह पर चौक और चौराहों रोडो पर लकड़ी इकट्ठा होना शुरू हो गया है। हालिका दहन वाले जगहो पर सड़के उखड जाती है,सड़कों को बचाने के लिए नगर निगम भी अपना काम शुरू कर दिया है। सड़कों को सुरक्षित रखने के लिए नगर निगम होलिका दहन वाले जगहों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है। होलिका दहन वाले जगहों पर सड़क खराब ना हो इसके लिए ईट और बालू रखी जाएगी। लगभग 3600 जगहों पर होलिका दहन किया जाता है इन जगहों को सुरक्षित रखने के लिए नगर निगम 72000 ईट और 36000 किलो बालू बिछाने को लेकर योजना बनाया है। अगले महीने 18 मार्च को होली है और ठीक उसके 1 दिन पहले यानि 17 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा।

बहुत से जगहों पर बसंत पंचमी के बीतते ही होलिका दहन के लिए लकड़ी इकट्ठा करना शुरू कर दिया गया है। आपको बता दें कि शहर में 3 सौ से 4 सौ मीटर दूरी पर ही कई जगहो होलिका दहन होता है। होलिका दहन होने वाले जगहों पर आग जलता है और सड़क का तारकोल उखड़ जाता है। जिससे सड़को को भरी नुक्सान होता है। उस जगह को बचाने के लिए नगर निगम के द्वारा उस स्थान पर पहले ईट बालू मिट्टी रखी जाएगी फिर उसके बाद ऊपर लकड़ी रखी जाएगी । इससे सड़क को कोई नुकसान नहीं होगा। आपको बता दें कि शहर में 36 सौ जगहों पर लकड़ी इकट्ठा किया जाता है और एक जगह पर लगभग 20 ईटों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में देखा जाए तो लगभग 72 हजार ईटों की जरूरत पड़ेगी। ठीक उसी प्रकार एक होलिका दहन वाले जगह पर 20 किलो बालों की जरूरत पड़ती है उस हिसाब से कुल बालू की लागत ३६ हजार किलोग्राम लगेगी।#kanpurholi2022

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