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बिहार में बारिश का इंतज़ार कर रहे बंधुओ के लिए मौसम विभाग का संदेश जारी

हम सभी मानसून का इंतजार करते हैं पर जिन राज्य में खेती का काम ज्यादा होता है। उनके लिए तो मॉनसून अगर जल्दी आ जाए तो किसी वरदान से कम नहीं, वही अगर बारिश ने देरी की, तो इसी मॉनसून को परेशानी का सबब बनते भी देर नहीं लगती। इस बार कुछ ऐसी ही परेशानी बिहार के किसानों के चेहरे पर साफ देखी जा सकती है, इसका कारण है वर्तमान में मॉनसून की ट्रफ रेखा का राज्य के दक्षिणी यानी उड़ीसा से गुजरना, जिसकी वजह से प्रदेश का मौसम काफी शुष्क हो गया है। अगर वर्तमान स्थिति की बात करें तो मानसून की ट्रफ लाइन राजस्थान के जैसलमेर, कोटा, मध्य प्रदेश के गुना,  दमोह एवं उड़ीसा होते हुए बंगाल की खाड़ी तक गुजर रही है। इसी स्थिति को देखते हुए यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि फिलहाल तो प्रदेश में भारी बारिश की संभावना ना के बराबर है। मौसम के जानकारों की मानें तो अगले 24 घंटे तक प्रदेश का मौसम काफी शुष्क रहेगा।

 

वर्तमान में प्रदेश में पूर्वी हवा का प्रवाह जारी है, जिसकी गति 10 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे आंकी गई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बारिश के आसार तभी बन सकते हैं जब मानसून की ट्रफ रेखा ऊपर उठेगी। सोमवार को राज्य में किसी जिले में बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई है। वर्तमान में अगर बंगाल की खाड़ी के उत्तरी भाग की बात करें तो वहां अभी स्थिति शांत है। मध्य भाग में धीरे-धीरे कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जिसका असर राज्य में अगले कुछ दिनों में दिखाई देगा।

 

# राजधानी में दिनभर उमस भरा रहा मौसम।

राजधानी की बात करें तो सोमवार को दिनभर उमस भरा मौसम रहा, लोग गर्मी से परेशान होते रहे। सुबह 8:00 बजे से जो धूप ने अपने तेवर दिखाने शुरू किए, दिन चढ़ने के साथ-साथ तेवर भी बढ़ता गया। दोपहर 2:00 बजे तो वातावरण में इतनी गर्मी आ गई कि घरों के पंखे भी काम नहीं आ रहे थे। लोगों को ना तो घरों में रहना ही बन रहा था और ना ही निकलना। सोमवार को राजधानी में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा में आद्रता मात्र 52% दर्ज की गई।

 

# वर्षा के अभाव में धान की रोपनी प्रभावित ।

आत्मा के उप परियोजना निदेशक वृजेन्द्र मणि का कहना है कि राज्य में वर्षा की काफी कमी महसूस की जा रही है। धान का बिचड़ा तैयार है। बारिश होते ही किसान धान की रोपनी शुरू कर देंगे। अगर एक सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो फिर धान की पैदावार प्रभावित हो सकती है। देर से बिचड़ा लगाने पर उसका प्रभाव फलन पर होता है। सामान्यत: राज्य में 25 मई से धान का बिचड़ा डालने का काम शुरू हो जाता है। उसके 20 दिनों के बाद धान की रोपनी शुरू कर दी जाती है। परंतु बारिश के अभाव में किसानों की नजर आकाश की ओर लगी है। जिन इलाके में नहर या बोरिंग से पानी मिल रहा है वहां पर धीरे-धीरे किसान रोपनी कर रहे हैं।

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